कैल्केरिया फॉसफोरस ( Calcarea Phos ) होम्योपैथिक दवा

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व्यापक-लक्षण तथा मुख्य-रोग 

(1) बच्चों के सम-विकास की औषधि (बच्चों की संजीविनी-बूटी)
(2) कैलकेरिया कार्ब तथा कैलकेरिया फॉस की तुलना
(3) बढ़ती आयु के बच्चों की टांग में दर्द
(4) बच्चों को ऐंठन
(5) दु:ख, दुखद-समाचार तथा निराश-प्रेम से रोग
(6) प्रथम मासिक-धर्म का सर्दी खा जाने से रुक जाना

(1) बच्चों के सम-विकास की औषधि (बच्चों की संजीविनी) – कैल्केरिया फॉस औषधि में कैल्सियम और फॉसफोरस का सम्मिश्रण है। दोषपूर्ण शारीरिक विकास के लिये यह महौषध है। इसका बच्चों के लिये विशेष उपयोग होता है। जिन बच्चों के गिल्टियां बनने लगती हैं, दांत ठीक समय पर नहीं निकलते, जिनकी अस्थियों का सम-विकास नहीं होता, रिकेट के शिकार हैं, अच्छा खाते-पीते हैं परन्तु भोजन शरीर को नहीं लगता, कद नहीं बढ़ता, पेट बढ़ जाता है, सिर की खोपड़ी की हड्डियां पिलपिली रहती हैं मानो जरा-सी चोट से भुरभुरा जायेंगी, हड्डियां जुड़ नहीं पातीं, गर्दन इतनी पतली कि सिर को थाम नहीं पाती – ऐसे बच्चों के लिये कैल्केरिया फॉस औषधि संजीविनी-बूटी का काम करती है। उनके शरीर के अणुओं में नव-शक्ति का संचार कर उन्हें स्वास्थ्य प्रदान करती है। अगर बच्चे की बढ़ती के साथ शरीर का विकास भी नहीं होता, तो इस औषधि को स्मरण करना होगा। मानसिक-दृष्टि से भी बच्चे का विकास रुका रहता है। यह बच्चा मोटा, थुलथुला, भारी भरकम, स्थूल तथा मांसल न होकर पतला-सुकड़ा होता है। उसकी छाती की हड्डियों को भी गिना जा सकता है।

(2) कैलकेरिया कार्ब तथा कैलकेरिया फॉस की तुलना – ऊपर हमने इस, औषधि के जो लक्षण दिये हैं वे कैलकेरिया कार्ब से लगभग मिलते-जुलते हैं, इसलिये इन दोनों का भेद समझ लेना जरूरी है। कैल्केरिया फॉस बायोकैमिक औषधि है। यह शुस्लर की 12 टिश्यु रेमेडीज में से एक है। होम्योपैथ और बायो-कैमिस्ट अपने-अपने सिद्धान्त के अनुसार इसका प्रयोग करते हैं। बायोकैमिस्ट्री के अनुसार कैल्केरिया फॉस की शरीर में कमी के कारण ऊपर कहे गये रक्तहीनता तथा कमजोरी के लक्षण प्रकट होते हैं, और इसलिये वे 3x, 6x और 12x में इसका प्रयोग करते हैं। होम्योपैंथ इसका प्रयोग अपनी दृष्टि से करते हैं। इन दोनों औषधियों का तुलनात्मक विवेचन निम्न है।

कैलकेरिया कार्ब – सुन्दर, मोटे, थुलथुले, मांसल बच्चे जिनकी सिर की तथा अन्य अंगों की अस्थियों का विकास क्षीण तथा अनियमित होता है। बालक के सिर पर बेहद पसीना आता है। यह बालक रिकेट की बीमारी और दांतों के निकलने में देर का शिकार होता है।

कैल्केरिया फॉस – पतला, दुबला, अच्छा खाते-पीते हुए भी क्षीण-शरीर, इतना पतला कि छाती की हड्डियां भी गिनी जा सकें, इसके साथ सिर की तथा अन्य अंगों की अस्थियों का विकास क्षीण तथा अनियमित होता है। बालक के सिर पर उतना पसीना नहीं आता जितना कैलकेरिया कार्ब के रोगी के सिर पर। यह बालक भी रिकेट की बीमारी और दांतों के निकलने में देर का शिकार होता है। ’

(3) बढ़ती हुई आयु के बच्चों की टांग आदि में दर्द – बच्चे जब आयु में बढ़ने लगते हैं तब प्राय: उनकी टांग या किसी अन्य अस्थि में दर्द हुआ करता है। इसे यह शान्त करता है।

(4) बच्चों को ऐंठन – बच्चों को अगर ऐंठन पड़ने लगे तब इससे लाभ होता है, परन्तु औषधि ऐंठन शान्त हो चुकने के बाद देनी चाहिये।

(5) दु:ख, दुखद समाचार या निराश-प्रेम से रोग – किसी दु:ख या दुखद समाचार के कारण या प्रेम में निराशा के कारण कोई रोग उत्पन्न हो जाय, तब भी इस औषधि को स्मरण रखना चाहिये।

(6) प्रथम मासिक-धर्म का सर्दी लग जाने के कारण रुक जाना – युवतियों का कैल्केरिया फॉस से अधिक अच्छा कोई मित्र नहीं है। जब नवयुवती यौवन में पदार्पण करने लगती है, तब अगर उसका मासिक-धर्म ठीक समय पर शुरू नहीं होता, तो इस औषधि से सब ठीक हो जाता है। कई लड़कियां प्रथम मासिक धर्म में ठंड खा जाती हैं जिससे उन्हें रज:काल में पीड़ा हुआ करती है। अगर इस हालत को ठीक समय पर न सुधार लिया जाय, तो कष्ट उम्र भर चिपटा रहता है। इस औषधि से यह कष्ट शुरू में ही ठीक हो जाता है। कई माताएं दो-तीन ऐसे बच्चे जन चुकी होती हैं जिनका शरीर कैलकेरिया फॉस का शरीर होता है। अगर ऐसी माता को गर्भ-काल में कैलकेरिया फॉस दिया जाय, तो उसके अगले बच्चे इन रोगों से मुक्त रहते हैं।

(7) शक्ति तथा प्रकृति – बायोकैमिक 1 से 3 ट्रिच्यूरेशन; होम्योपैथिक उच्च-शक्ति अधिक लाभप्रद है। औषधि ‘सर्द’-Chilly-प्रकृति के लिये हैं।

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