Rapid Ejaculation In Homeopathy

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जैसे ही कोई व्यक्ति स्त्री – संसर्ग आरंभ करने का प्रयास करता है वैसे ही उसका वीर्यपात हो जाता है जिससे वह सुख प्राप्त नहीं कर पाता- यही स्थिति शीघ्रपतन कहलाती है । स्वप्नदोष तथा अनैच्छिक वीर्यपात में बताई गई दवायें लक्षणानुसार इस रोग में भी दी जा सकती हैं । अन्य कुछ विशेष दवाओं का विवरण यहाँ पर दिया जा रहा है

शीघ्रपतन

फिकस इण्डिका Q – इस दवा को पानी में मिलाकर प्रतिदिन दो या तीन बार लेने से रोग में आराम होता है ।

इरिञ्जियम एक्वेटिकम Q – इस दवा को पानी में मिलाकर देने से रोग में आराम होता है । रोगी में कामोत्तेजना भी नहीं आ पाती कि उसका वीर्यपात हो जाता है- यह मुख्य लक्षण है ।

एग्नस कैस्टस 30, 200 – जो व्यक्ति पूर्व में अत्यधिक भोग कर चुके हैं जिसकी वजह से उन्हें यह रोग उत्पन्न हो गया हो, रोगी का स्वभाव चिड़चिड़ा हो, रोगी शीघ्र ही क्रोधित हो जाता हो- इन लक्षणों में यह दवा लाभप्रद है । यह दवा रोगी में नई जान फ्रैंक देती है । इसका प्रारंभ 30 शक्ति से करते हुये 200 या आगे तक ले जाना चाहिये ।

सेलेनियम 30, 200 – रोगी में कामेच्छा तो अत्यन्त तीव्र होती है लेकिन उसका वीर्यपात शीघ्र हो जाता है- यह इस दवा का सबसे प्रमुख लक्षण है। रोगी में कामेञ्छा कभी-कभी इतनी तीव्र हो जाती है कि उसे हस्तमैथुन तक का सहारा लेना पड़ता है लेकिन जब ऐसा रोगी स्त्री के पास जाता है तो उसका शीघ्र वीर्यपात हो जाता है ।

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1 COMMENT

  1. शीघ्रपतन में कौन सी मेडिसिन कितने दिन उपयोग करनी चाहिए

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